बिदर उत्तर के वार्ड क्रमांक 29 एवं 30 के नागरिकों की समस्याओं के समाधान एवं जनसुनवाई के उद्देश्य से भवानी मंदिर परिसर में आज प्रातः लगभग 11:30 बजे जनस्पंदन कार्यक्रम आयोजित किया गया।
यह कार्यक्रम नगर निगम बिदर तथा संबंधित वार्ड पार्षदों के सहयोग से आयोजित किया गया, जिसमें क्षेत्र के नागरिकों ने अपनी विभिन्न समस्याएँ एवं सुझाव अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, नगर निगम अधिकारियों एवं बड़ी संख्या में नागरिकों ने भाग लिया।
जनस्पंदन कार्यक्रम का उद्देश्य नागरिकों की शिकायतों को सीधे सुनकर उनके त्वरित समाधान हेतु आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
SUBSCRIBE, LIKE & SHARE to MAX. PEOPLE.
--
#UcpVoiceNews #UcpNews #UcpVoice #breakingnews
*UCP Voice देश की आवाज़ * ..... ..... .......
यह कार्यक्रम नगर निगम बिदर तथा संबंधित वार्ड पार्षदों के सहयोग से आयोजित किया गया, जिसमें क्षेत्र के नागरिकों ने अपनी विभिन्न समस्याएँ एवं सुझाव अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, नगर निगम अधिकारियों एवं बड़ी संख्या में नागरिकों ने भाग लिया।
जनस्पंदन कार्यक्रम का उद्देश्य नागरिकों की शिकायतों को सीधे सुनकर उनके त्वरित समाधान हेतु आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
SUBSCRIBE, LIKE & SHARE to MAX. PEOPLE.
--
#UcpVoiceNews #UcpNews #UcpVoice #breakingnews
*UCP Voice देश की आवाज़ * ..... ..... .......
संविधान निर्माता के प्रश्न पर एक विचार :
“सही जानकारी का प्रसार होना चाहिए” —
इसी उद्देश्य के साथ यह प्रश्न उठाया जा रहा है कि क्या भारतीय संविधान के निर्माण को केवल एक ही व्यक्ति तक सीमित करना उचित है?
इतिहास के अनुसार, बाल गंगाधर तिलक ने 1895 में “स्वराज बिल” के माध्यम से भारत के लिए एक प्रारंभिक संवैधानिक ढांचा प्रस्तुत किया, जिसमें लगभग 113 अनुच्छेद बताए जाते हैं। यह भारत में संवैधानिक सोच की एक प्रारंभिक पहल मानी जाती है।
इसके बाद एम. एन. रॉय ने 1928 और 1944 में संवैधानिक विचारों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया, जिसमें लगभग 13 अध्याय और 137 अनुच्छेदों का उल्लेख मिलता है। ..... ..... .......
“सही जानकारी का प्रसार होना चाहिए” —
इसी उद्देश्य के साथ यह प्रश्न उठाया जा रहा है कि क्या भारतीय संविधान के निर्माण को केवल एक ही व्यक्ति तक सीमित करना उचित है?
इतिहास के अनुसार, बाल गंगाधर तिलक ने 1895 में “स्वराज बिल” के माध्यम से भारत के लिए एक प्रारंभिक संवैधानिक ढांचा प्रस्तुत किया, जिसमें लगभग 113 अनुच्छेद बताए जाते हैं। यह भारत में संवैधानिक सोच की एक प्रारंभिक पहल मानी जाती है।
इसके बाद एम. एन. रॉय ने 1928 और 1944 में संवैधानिक विचारों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया, जिसमें लगभग 13 अध्याय और 137 अनुच्छेदों का उल्लेख मिलता है। ..... ..... .......
संविधान निर्माता के प्रश्न पर एक विचार :
https://www.khabaronline.top/news_week.php?view=69e33ffc0d55a
“सही जानकारी का प्रसार होना चाहिए” —
इसी उद्देश्य के साथ यह प्रश्न उठाया जा रहा है कि क्या भारतीय संविधान के निर्माण को केवल एक ही व्यक्ति तक सीमित करना उचित है?
इतिहास के अनुसार, बाल गंगाधर तिलक ने 1895 में “स्वराज बिल” के माध्यम से भारत के लिए एक प्रारंभिक संवैधानिक ढांचा प्रस्तुत किया, जिसमें लगभग 113 अनुच्छेद बताए जाते हैं। यह भारत में संवैधानिक सोच की एक प्रारंभिक पहल मानी जाती है।
इसके बाद एम. एन. रॉय ने 1928 और 1944 में संवैधानिक विचारों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया, जिसमें लगभग 13 अध्याय और 137 अनुच्छेदों का उल्लेख मिलता है। ..... ..... .......
https://www.khabaronline.top/news_week.php?view=69e33ffc0d55a
“सही जानकारी का प्रसार होना चाहिए” —
इसी उद्देश्य के साथ यह प्रश्न उठाया जा रहा है कि क्या भारतीय संविधान के निर्माण को केवल एक ही व्यक्ति तक सीमित करना उचित है?
इतिहास के अनुसार, बाल गंगाधर तिलक ने 1895 में “स्वराज बिल” के माध्यम से भारत के लिए एक प्रारंभिक संवैधानिक ढांचा प्रस्तुत किया, जिसमें लगभग 113 अनुच्छेद बताए जाते हैं। यह भारत में संवैधानिक सोच की एक प्रारंभिक पहल मानी जाती है।
इसके बाद एम. एन. रॉय ने 1928 और 1944 में संवैधानिक विचारों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया, जिसमें लगभग 13 अध्याय और 137 अनुच्छेदों का उल्लेख मिलता है। ..... ..... .......
👉 “क्या आप जानते हैं? एम. एन. रॉय भारत के संविधान को लिखने वाले पहले व्यक्ति थे।”
✔️ संविधान सभा (Constituent Assembly) का विचार सबसे पहले प्रस्तावित करने वाले 1928,
✔️ 1944 में भारत के लिए संविधान का प्रारूप (ड्राफ्ट) तैयार करने वाले पहले भारतीयों में से एक ,
✔️ 13 अध्याय और 137 अनुच्छेद लिखे .
✔️ संविधान सभा (Constituent Assembly) का विचार सबसे पहले प्रस्तावित करने वाले 1928,
✔️ 1944 में भारत के लिए संविधान का प्रारूप (ड्राफ्ट) तैयार करने वाले पहले भारतीयों में से एक ,
✔️ 13 अध्याय और 137 अनुच्छेद लिखे .
👉 “क्या आप जानते हैं? बाल गंगाधर तिलक कि मदद से भारत का पहला संविधान लिखा गया ।”
✔️ 1895 में भारत के लिए संविधान का प्रारूप (ड्राफ्ट) तैयार किया गया " स्वराज बिल ",
✔️ 113 अनुच्छेद लिखे .
https://politicsforindia.com/2-making-of-the-indian-constitution-psir/
https://www.dailyexcelsior.com/a-peep-into-history-of-indian-constitution/#:~:text=The%20first%20non%2Dofficial%20attempt,of%20the%20local%20legislative%20council. ..... ..... .......
✔️ 1895 में भारत के लिए संविधान का प्रारूप (ड्राफ्ट) तैयार किया गया " स्वराज बिल ",
✔️ 113 अनुच्छेद लिखे .
https://politicsforindia.com/2-making-of-the-indian-constitution-psir/
https://www.dailyexcelsior.com/a-peep-into-history-of-indian-constitution/#:~:text=The%20first%20non%2Dofficial%20attempt,of%20the%20local%20legislative%20council. ..... ..... .......
मैं देश में कुछ भी गलत नहीं होने दूंगा
“मैं देश में कुछ भी गलत नहीं होने दूंगा” — यह केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि एक संकल्प, एक जिम्मेदारी और एक जागरूक नागरिक का कर्तव्य है। जब कोई व्यक्ति इस विचार को अपनाता है, तो वह पूरे समाज और देश के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक मजबूत कदम बढ़ाता है।
आज देश अनेक चुनौतियों से गुजर रहा है—भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, अपराध, सामाजिक असमानता और नैतिक मूल्यों में गिरावट। इन समस्याओं का समाधान केवल सरकार या किसी एक संस्था के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। हर नागरिक की सक्रिय भागीदारी ही देश को सही दिशा दे सकती है। यदि हर व्यक्ति यह ठान ले कि वह गलत का साथ नहीं देगा, तो परिवर्तन निश्चित है।
इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए विनय बिरादर ( यूनिवर्स सिटीजन पार्टी के अध्यक्ष ) ने भी समाज में जागरूकता लाने और लोगों को जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित किया है। उनका मानना है कि जब तक आम जनता खुद गलत के खिलाफ खड़ी नहीं होगी, तब तक सच्चा बदलाव संभव नहीं है। उनका यह दृष्टिकोण युवाओं और समाज के हर वर्ग के लिए एक प्रेरणा है।
..... ..... .......
“मैं देश में कुछ भी गलत नहीं होने दूंगा” — यह केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि एक संकल्प, एक जिम्मेदारी और एक जागरूक नागरिक का कर्तव्य है। जब कोई व्यक्ति इस विचार को अपनाता है, तो वह पूरे समाज और देश के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक मजबूत कदम बढ़ाता है।
आज देश अनेक चुनौतियों से गुजर रहा है—भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, अपराध, सामाजिक असमानता और नैतिक मूल्यों में गिरावट। इन समस्याओं का समाधान केवल सरकार या किसी एक संस्था के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। हर नागरिक की सक्रिय भागीदारी ही देश को सही दिशा दे सकती है। यदि हर व्यक्ति यह ठान ले कि वह गलत का साथ नहीं देगा, तो परिवर्तन निश्चित है।
इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए विनय बिरादर ( यूनिवर्स सिटीजन पार्टी के अध्यक्ष ) ने भी समाज में जागरूकता लाने और लोगों को जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित किया है। उनका मानना है कि जब तक आम जनता खुद गलत के खिलाफ खड़ी नहीं होगी, तब तक सच्चा बदलाव संभव नहीं है। उनका यह दृष्टिकोण युवाओं और समाज के हर वर्ग के लिए एक प्रेरणा है।
..... ..... .......
शिक्षा के बाद भी रोजगार की चुनौती और शतरंज के माध्यम से नया करियर
आज के समय में यह एक कड़वी सच्चाई है कि दुनिया भर में शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद भी युवाओं को पर्याप्त और सम्मानजनक वेतन वाली नौकरियां नहीं मिल पा रही हैं। लाखों छात्र डिग्री हासिल करने के बाद भी बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं। कुछ गिने-चुने लोगों को ही अच्छी नौकरी मिलती है, जबकि अधिकांश युवाओं को मजबूरी में छोटे-मोटे काम करने पड़ते हैं।
कई बार परिस्थितियां इतनी कठिन हो जाती हैं कि कुछ लोग गलत रास्तों की ओर भी मुड़ जाते हैं। वहीं, बहुत से लोग अपनी आजीविका चलाने के लिए छोटी दुकानों, फुटपाथ पर व्यवसाय या अन्य अस्थायी कामों में लग जाते हैं। यह स्थिति न केवल युवाओं के भविष्य के लिए चिंता का विषय है, बल्कि समाज के विकास में भी बाधा बनती है।
इसी गंभीर समस्या को समझते हुए Bidar District Chess Association ने एक सराहनीय पहल की है। संस्था का उद्देश्य है कि हर नागरिक और छात्र को शतरंज के माध्यम से एक स्थायी और सम्मानजनक करियर का अवसर प्रदान किया जाए।
शतरंज केवल एक खेल नहीं, बल्कि मानसिक विकास, रणनीतिक सोच और निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाने वाला एक सशक्त माध्यम है। इस क्षेत्र में खिलाड़ी, कोच, ट्रेनर, आयोजक और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से कई प्रकार के करियर विकल्प उपलब्ध हैं।
संस्था सभी इच्छुक विद्यार्थियों और नागरिकों को आमंत्रित करती है कि वे इस पहल से जुड़ें और अपने जीवन को एक नई दिशा दें। शतरंज के माध्यम से न केवल रोजगार के अवसर मिल सकते हैं, बल्कि एक सम्मानजनक और स्थिर जीवन भी प्राप्त किया जा सकता है।
आइए, शतरंज के साथ जुड़कर अपने भविष्य को सुरक्षित और सफल बनाएं। ..... ..... .......
आज के समय में यह एक कड़वी सच्चाई है कि दुनिया भर में शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद भी युवाओं को पर्याप्त और सम्मानजनक वेतन वाली नौकरियां नहीं मिल पा रही हैं। लाखों छात्र डिग्री हासिल करने के बाद भी बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं। कुछ गिने-चुने लोगों को ही अच्छी नौकरी मिलती है, जबकि अधिकांश युवाओं को मजबूरी में छोटे-मोटे काम करने पड़ते हैं।
कई बार परिस्थितियां इतनी कठिन हो जाती हैं कि कुछ लोग गलत रास्तों की ओर भी मुड़ जाते हैं। वहीं, बहुत से लोग अपनी आजीविका चलाने के लिए छोटी दुकानों, फुटपाथ पर व्यवसाय या अन्य अस्थायी कामों में लग जाते हैं। यह स्थिति न केवल युवाओं के भविष्य के लिए चिंता का विषय है, बल्कि समाज के विकास में भी बाधा बनती है।
इसी गंभीर समस्या को समझते हुए Bidar District Chess Association ने एक सराहनीय पहल की है। संस्था का उद्देश्य है कि हर नागरिक और छात्र को शतरंज के माध्यम से एक स्थायी और सम्मानजनक करियर का अवसर प्रदान किया जाए।
शतरंज केवल एक खेल नहीं, बल्कि मानसिक विकास, रणनीतिक सोच और निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाने वाला एक सशक्त माध्यम है। इस क्षेत्र में खिलाड़ी, कोच, ट्रेनर, आयोजक और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से कई प्रकार के करियर विकल्प उपलब्ध हैं।
संस्था सभी इच्छुक विद्यार्थियों और नागरिकों को आमंत्रित करती है कि वे इस पहल से जुड़ें और अपने जीवन को एक नई दिशा दें। शतरंज के माध्यम से न केवल रोजगार के अवसर मिल सकते हैं, बल्कि एक सम्मानजनक और स्थिर जीवन भी प्राप्त किया जा सकता है।
आइए, शतरंज के साथ जुड़कर अपने भविष्य को सुरक्षित और सफल बनाएं। ..... ..... .......
Sponsored / Featured Ads
Contact for ADS
8748888103/100
Sponsored by People of Universe